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sainath

साईंबाबा के अनमोल वचन


मेरे रहते डर कैसा?
मैं निराकार हूँ और सर्वत्र हूँ.
मैं हर एक वस्तु में हूँ,
और उससे परे भी.
मैं सभी रिक्त स्थान को भरता हूँ.
आप जो कुछ भी देखते हैं,
उसका संग्रह हूँ मैं.
मैं डगमगाता या हिलता नहीं हूँ.
यदि कोई अपना पूरा समय मुझमें लगाता है,
और मेरी शरण में आता है,
तो उसे अपने शरीर
या आत्मा के लिए कोई
भय नहीं होना चाहिए.
यदि कोई सिर्फ
और सिर्फ मुझको देखता है,
और मेरी लीलाओं को सुनता है ,
और खुद को सिर्फ मुझमें समर्पित करता है,
तो वह भगवान तक पंहुच जायेगा.
मेरा काम आशीर्वाद देना है.
मैं किसी पर क्रोधित नहीं होता,
क्या माँ अपने बच्चों से नाराज हो सकती है ?
क्या समुद्र अपना जल वापस नदियों में भेज सकता है ?
मैं तुम्हे अंत तक ले जाऊंगा.
पूर्ण रूप से ईश्वर में समर्पित हो जाइये.
यदि तुम मुझे अपने विचारों
और उद्देश्य की एकमात्र वस्तु रक्खोगे,
तो तुम सर्वोच्च लक्ष्य प्राप्त करोगे.
अपने गुरु में पूर्ण रूप से विश्वास करें.
यही साधना है
मैं अपने भक्त का दास हूँ.
मेरी शरण में रहिये और शांत रहिये,
मैं बाकी सब कर दूंगा.
हमारा कर्तव्य क्या है?
ठीक से व्यवहार करना. ये काफी है.
मेरी दृष्टि हमेशा उनपर रहती है,
जो मुझे प्रेम करते हैं.
तुम जो भी करते हो,
तुम चाहे जहाँ भी हो,
हमेशा इस बात को याद रखो:
मुझे हमेशा इस बात का ज्ञान रहता है,
कि तुम क्या कर रहे हो.
मैं अपने भक्तों का अनिष्ट नहीं होने दूंगा.
अगर मेरा भक्त गिरने वाला होता है,
तो मैं अपने हाथ बढ़ा कर उसे सहारा देता हूँ.
मैं अपने लोगों के बारे में दिन रात सोचता हूँ.
मैं बार-बार उनके नाम लेता हूँ.


jay-sainath

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